मनका संवेग हरु
Thursday, 26 July 2012
मुक्तक
जवानी जोसले हरिप पो देखिएँ !
च्यातेको लुगाले गरिब पो देखिएँ !!
टाई र सुट त्यो लगाउन थालेसी ,
दुनिया माझ म सरिक पो देखिएँ !!
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